Mahatma Gandhi

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Mahatma Gandhi

Mahatma Gandhi का संक्षिप्त परिचय

Mahatma Gandhi का जन्म 1879 में हुआ था गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था।इनकी माता का नाम पुतलीबाई और पिता का नाम करमचंद गांधी था। शिक्षा गुजरात के राजकोट में हुआ था। 

इनके प्रथम शिक्षक गोपाल कृष्ण गोखले थे। गांधी जी को भारत का राष्ट्रपिता भी कहा जाता है । अहिंसा के माध्यम से ब्रिटिश शासक से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । गांधी जी का निधन 30 जनवरी 1948 को दिल्ली में हुआ था। 

महात्मा गांधी: प्रारंभिक जीवन और शिक्षा 

महात्मा गांधी का जन्म एक मध्यम परिवार में हुआ था। और वह जाति से वैश्य थे। उनके पिता की लगातार तीन पत्नियों के मृत्यु के बाद चौथा विवाह पुतलीबाई से किया था।इनके द्वारा ही महात्मा गांधी का जन्म हुआ।माता धार्मिक विचारों वाली महिला थी गांधी जी अपनी मां के विचारों  से बहुत प्रभावित थे। वे वैष्णव धर्म के अनुयाई होने के कारण वह मांस, भक्षण और धूम्रपान को पाप मानते थे। जब गांधी जी की आयु 7 वर्ष की हुई तब उनके परिवारके राजकोट में आकर रहने लग गया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में रहकर पूर्ण की। प्रारंभिक जीवन की शिक्षा में गांधी जी बहुत कमजोर, मध्यम,शांत,शर्मीले और मध्यम श्रेणी के छात्र थे।यह कभी अनुमान नहीं लगाया जा सकता था कि यह बड़े होकर एक महान और सफल व्यक्ति बनेंगे। आगे की हाई एजुकेशन के लिए इंग्लैंड गए थे। वहीं से वकालत की शिक्षा ली। 1991 में वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद यह लंदन हाई कोर्ट में इनरोल हुए। 

महात्मा गांधी जी का पारिवारिक जीवन

13 वर्ष की उम्र में ही इनका विवाह(1883) कस्तूरबा गांधी से हो गया था। 1885 में इनका पहला पुत्र हुआ था,जो कुछ दिन तक ही जीवित रहा। उसके बाद उनके चार पुत्र हीरालाल (1888),मणिलाल,(1892)रामदास,(1897)और देवदास(1900) पैदा हुए। 

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महात्मा गांधी जी का दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष और सत्याग्रह की शुरुआत

अफ्रीका में गांधी जी ने देखा कि वहां रंग भेद और नस्लीय भेदभाव का प्रभाव अपनी चरम सीमा पर था।प्रभाव को दूर करने के लिए गांधी जी ने अहिंसक संघर्ष किया। गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में हीअपनी प्रसिद्ध अहिंसा का प्रतिरोधकी रणनीति का प्रयोग किया  इससे भारतीयों को सफलता दिलाने में मदद मिली। गांधी जी इसी सफलता के बाद भारत वापस लौटने का निर्णय लिया। 

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी का नेतृत्व

गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में कई वर्षों तक संघर्ष किया और वहां के अनुभवों को भारत में लागू करने का प्रयास किया।गांधी जी पूर्व तथा अस्थाई रूप से 1915 में भारत वापस आए,भारत वापस आने का उनका एकमात्र उद्देश्य था कि स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देना तथा देश की सेवा करना।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी का योगदान आंदोलन

गांधी जी ने सबसे पहले भारतीयों को एकजुट करने का प्रयास किया तथा अपने सत्य और अहिंसा का प्रचार कर, उनके महत्व के बारे में बतलाया। गांधी जी ने सामाजिक सुधार के लिए भी अनेक कार्य किये, जैसे गरीब ,दलित, शोषित वर्ग के अधिकारों की रक्षा।गांधी जी के भारत वापस आने से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा मिली उन्होंने अपने पूरे जीवन को समर्पित कर दिया। 

गांधी जी ने गोपाल दास गोखले को अपना गुरु बनाया और राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए महात्मा गांधी जी ने 1918 में बिहार और गुजरात के चंपारण और खेड़ा आंदोलन का नेतृत्व किया । 1 अगस्त 1920 को असहयोग आंदोलन की शुरुआत कीऔर इसे 11 फरवरी1922 को चौरी चौरा नामक स्थान पर वापस लिया । 12 मार्च 1930 को सविनय अवज्ञा आंदोलनदांडी मार्च के साथ शुरुआत की। और फिर 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की।गांधी जी ने इन सभी आंदोलन की शुरुआत और नेतृत्व किया। और अंग्रेजों को लोहा बनवाया।

गांधी जी के मुख्य संदेश और नारा

गांधी जी के मुख्य संदेश “मेरा जीवन ही मेरा संदेश है। और “करो या मरो,” “ अंग्रेजों भारत छोड़ो ”तथा निष्ठा की सीख- हमें किसी भी चीज को खाने से पहले खुद पर अमल करना चाहिए। 

भारत का विभाजन और गांधीजी की हत्या

भारत के विभाजन को गांधी जी ने एक पागलपन का नाम दियाऔर गांधी जी विभाजन के सख्त खिलाफ थे गांधी जी भारत के विभाजन में शामिल होने से साफ मना कर दिए थे तथाभारत को एक धर्मनिरपेक्ष देश बनाना चाहते थे ।  कुछ समुदाय तथा लोगों ने भारत के विभाजन  के लिए गांधी जी को भी जिम्मेदार माना। इसीलिए 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे के द्वारा गांधी जी की हत्या कर दी गई। गांधी जी के अंतिम शब्द “हे राम” थे । 

भारतीय स्वतंत्रता में गांधी जी का महत्व

भारतीय स्वतंत्रता में गांधी जी का बड़ा योगदान था ।उनके योगदान से सभीस्वतंत्रता सेनानी प्रभावित थे,इसीलिए इनको रविंद्र नाथ टैगोर ने राष्ट्रपिता कहा था।तथा सुभाष चंद्र बोस ने बापू शब्द का उपयोग किया था ।गांधी जी के एक इशारे पर हजारों लाखों देशभक्त आंदोलन के लिए तैयार हो जाते थे। गांधी जी ने अपना सारा जीवन सदा जीवन उच्च विचारसे प्रेरित होकर व्यतीत किया था। सत्याग्रह औरअहिंसा पर इतनेप्रभावित थे की चोरी चोरा नामक स्थान परहिंसा के कारण उन्होंने अपना आंदोलन वापस ले लिया था ।

 निष्कर्ष

गांधी जी ने अपने पूरी संघर्ष यात्रा के दौरानभारत में कई आंदोलन का नेतृत्व कियातथा वह सदैव सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चले। गांधी जी ने धैर्य साहस और ईमानदारी तथा पर्यावरण को प्रति प्रेम जैसे मूल्य को अपनाया। गांधी जी के विचारों से हमें आत्मनिर्भरता की सीख मिलती है।


महात्मा गांधी के अद्भुत विचार जो आज भी प्रासंगिक हैं”

महात्मा गांधी के अद्भुत विचार, जैसे कि सत्य, अहिंसा, और स्वदेशी, आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि वे मानव मूल्यों, सामाजिक न्याय, और पर्यावरणीय स्थिरता पर जोर देते हैं। गांधी जी का मानना ​​था कि व्यक्तिगत और सामाजिक परिवर्तन एक साथ होते हैं, और अहिंसात्मक प्रतिरोध हिंसात्मक संघर्षों से बेहतर समाधान प्रदान कर सकता 
 गांधी जी स्वदेशी के समर्थक थे

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